पुस्तकालय में खोजें
583 परिणाम
गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस का पाँचवाँ सोपान — हनुमान जी का समुद्र लाँघना, सीता जी की खोज, लंका दहन और श्रीराम का सेतु के लिए समुद्र तट पर पहुँचना। सम्पूर्ण मूल पाठ, साठ दोहों सहित।
जैन धर्म का मूल मंत्र, प्राकृत में, हिन्दी अर्थ सहित। पंच परमेष्ठी को नमस्कार, जो सब पापों का नाश करने वाला और सब मंगलों में प्रथम मंगल है।
शिरडी के साईंबाबा की मराठी आरती, जो गुरुवार की पूजा और साईं मन्दिरों में गाई जाती है।
शिव जी की आरती, जो सोमवार, महाशिवरात्रि और श्रावण मास की पूजा में गाई जाती है। ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव की एकता का स्मरण।
हनुमान जी की आरती, जो मंगलवार और शनिवार की पूजा तथा हनुमान चालीसा के पाठ के बाद गाई जाती है।
तुलसीदास रचित श्रीराम की स्तुति, छह छंदों और समापन सोरठा सहित। रामनवमी और राम पूजा में गाई जाती है।
वेदमाता गायत्री की आरती, जिसमें ज्ञान का दीप और श्रद्धा की बाती अर्पित करने का भाव है।
सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती, जो प्रायः हर पूजा के अन्त में की जाती है। जगदीश हरि की स्तुति, जो भक्तों के संकट क्षण भर में दूर करते हैं।
सत्यनारायण भगवान की आरती, जो सत्यनारायण व्रत कथा के समापन पर गाई जाती है।
महालक्ष्मी जी की आरती, जो दीपावली और शुक्रवार की पूजा में गाई जाती है। सुख, सम्पत्ति और ऋद्धि-सिद्धि की दात्री का स्मरण।
विद्या, बुद्धि और भक्ति की जननी सरस्वती जी की आरती, जो वसन्त पंचमी और विद्यारम्भ के अवसर पर गाई जाती है।
माँ दुर्गा की आरती, जो नवरात्रि और देवी पूजा में गाई जाती है। शुम्भ-निशुम्भ और महिषासुर का संहार करने वाली अम्बे गौरी की स्तुति।
श्रीकृष्ण की आरती, जिसमें गिरिधर कृष्णमुरारी के मोर-मुकुट, मुरली और वृन्दावन की छवि का वर्णन है।
गणेश जी की आरती, जो हर पूजा और मंगल कार्य के आरम्भ में गाई जाती है। एकदन्त, चार भुजाधारी और मूषक पर सवार विघ्नहर्ता का स्मरण।
तुलसीदास रचित आठ छंदों का स्तवन, जो हनुमान जी के संकट हरने वाले रूप का स्मरण कराता है। हनुमान चालीसा के बाद इसका पाठ किया जाता है।
જૈન સ્તોત્ર · A Jain devotional text, carried under its own tradition.
જૈન સ્તોત્ર · A Jain devotional text, carried under its own tradition.
583 में से प्रथम 36। ऊपर के फ़िल्टर से सीमित करें।