🪔

आरती श्री सत्यनारायण जी की

Satyanarayan Aarti

आरती · 🪷 भगवान विष्णु · Hindi · ⏱ 1 min

अन्य नाम · Also known as Jai Lakshmiramana · Satyanarayan Ji Ki Aarti · जय श्री लक्ष्मीरमणा · सत्यनारायण जी की आरती

सत्यनारायण भगवान की आरती, जो सत्यनारायण व्रत कथा के समापन पर गाई जाती है।

अक्षर का आकार

जय श्री लक्ष्मीरमणा, जय श्री लक्ष्मीरमणा।
सत्यनारायण स्वामी, जन-पातक-हरणा।जय॥

रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजै।
नारद करत निरंजन, घण्टा ध्वनि बाजै।जय॥

प्रकट भये कलिकारण, द्विज को दर्श दियो।
बूढो ब्राह्मण बनके, कंचन महल कियो।जय॥

दुर्बल भील कठारो, जिन पर कृपा करी।
चन्द्रचूड़ एक राजा, जिनकी विपत्ति हरी।जय॥

वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्हीं।
सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर अस्तुति कीन्हीं।जय॥

भाव-भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धर्यो।
श्रद्धा धारण कीनी, तिनको काज सर्यो।जया॥

ग्वाल-बाल संग राजा, बन में भक्ति करी।
मनवांछित फल दीन्हों, दीनदयालु हरी।जय॥

चढ़त प्रसाद सवायो, कदली फल मेवा।
धूप दीप तुलसी से, राजी सत्यदेवा।जय॥

श्री सत्यनारायण जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्दस्वामी मनवांछित फल पावे।जय॥

स्रोत · Source

मुद्रित आरती पुस्तिका · पाठ AaradhyaHub द्वारा उपलब्ध कराया गया
Supplied by AaradhyaHub · Public domain

#vishnu#aarti#satyanarayan#katha

सम्बन्धित पाठ · Related reading

सम्बन्धित अनुष्ठान · The ritual this belongs to

This aarti closes the Satyanarayan Katha, after the five chapters have been read.

Satyanarayan Katha →or find a pandit
और आरतीपुस्तकालयभगवान विष्णु