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ओ३म जय जगदीश हरे

Om Jai Jagdish Hare Aarti

आरती · 🪷 भगवान विष्णु · Hindi · ⏱ 1 min

अन्य नाम · Also known as Om Jai Jagadish Hare · Jagdish Aarti · Vishnu Aarti · ओम जय जगदीश हरे · जगदीश आरती · विष्णु आरती

सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती, जो प्रायः हर पूजा के अन्त में की जाती है। जगदीश हरि की स्तुति, जो भक्तों के संकट क्षण भर में दूर करते हैं।

अक्षर का आकार

ओ३म् जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनन के संकट, क्षण में दूर करे॥ॐ॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।प्रभु॥
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ॐ॥

मात पिता तुम मेरे शरण गहूँ मैं किसकी।प्रभु॥
तुम बिन और न दूजा, आस करुँ जिसकी॥ॐ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।प्रभु॥
पारब्रह्म परमेश्वर तुम सबके स्वामी॥ॐ॥

तुम करूणा के सागर, तुम पालन कर्ता।प्रभु॥
मैं मूरख खल कामी कृपा करो भर्ता॥ॐ॥

तुम हो एक अगोचर सबके प्राणपति।प्रभु॥
किस विधि मिलूँ दयामय! तुमको मैं कुमति॥ॐ॥

दीनबन्धु दुःख हर्ता, तुम रक्षक मेरे।प्रभु॥
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ॐ॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।प्रभु॥
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ॐ॥

तन, मन, धन सब कुछ है तेरा।प्रभु॥
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥ॐ॥

स्रोत · Source

मुद्रित आरती पुस्तिका · पाठ AaradhyaHub द्वारा उपलब्ध कराया गया
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